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Showing posts from November, 2025

श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी पुण्यतिथि पर श्रीनगर से निकले नगर कीर्तन में भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल और उमर अब्दुल्ला की प्रमुख भागीदारी

 श्री गुरु तेग बहादुर जी — नौवें सिख गुरु — की 350वीं शहीदी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में श्रीनगर में ऐतिहासिक नगर कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल तथा जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विशेष रूप से हिस्सा लिया। यह विशाल धार्मिक यात्रा श्रीनगर के गुरुद्वारा छैवें पातशाही से आरंभ हुई और 22 नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब में समापन के लिए निर्धारित है। यात्रा जम्मू, पठानकोट और होशियारपुर जैसे प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी। पूरे मार्ग में धार्मिक उत्साह देखते ही बनता है — पालकी साहिब, पंज प्यारें, गतका दल, पंज निशांची, नगाड़ा, रागी जत्थे, डिजिटल म्यूज़ियम, लंगर सेवाएँ और सैकड़ों वॉलंटियर इसके केंद्र में हैं, जबकि हजारों श्रद्धालु पूरे भाव और आस्था के साथ शामिल हो रहे हैं। नेताओं की उपस्थिति का संदेश: एकता, सद्भाव और धार्मिक विविधता का सम्मान भारी भीड़ के बीच तीन प्रमुख मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति अपने आप में एक महत्वपूर्ण संदेश देती है — देश की विविध धार्मिक परंपराओं के प्रति स...

20 साल से पुराने वाहनों के फिटनेस टेस्ट शुल्क दोगुने: वाहन मालिकों के लिए इसका क्या मतलब है

 यह फैसला सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक खर्च प्रबंधन — तीनों पहलुओं से जुड़ा है। भारत में 20 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों के फिटनेस टेस्ट शुल्क को दोगुना करने का निर्णय हाल ही में लागू किया गया है, और इसका असर करोड़ों वाहन मालिकों पर पड़ेगा। यह कदम सरकार की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत पुराने, प्रदूषण बढ़ाने वाले और असुरक्षित वाहनों को धीरे-धीरे सड़कों से हटाने का लक्ष्य रखा गया है। फिटनेस टेस्ट क्यों ज़रूरी है? भारत में निजी वाहन जैसे ही 15 या 20 वर्ष पूरे करते हैं (श्रेणी के अनुसार), उन्हें फिटनेस टेस्ट कराना अनिवार्य हो जाता है। इस टेस्ट में वाहन की रोड-वर्थिनेस जांची जाती है — उत्सर्जन ब्रेक लाइट बॉडी कंडीशन मैकेनिकल स्थिति यदि वाहन टेस्ट में पास नहीं होता, तो उसका रजिस्ट्रेशन आगे जारी नहीं किया जा सकता। पुराने इंजन और घिसे-पिटे पार्ट्स के चलते 20 साल पुराने वाहन प्रदूषण में काफी योगदान करते हैं और कई बार सुरक्षा जोखिम भी पैदा करते हैं। फिटनेस टेस्ट को कड़ा करने का उद्देश्य ऐसे वाहनों को सड़कों से हटाकर सुरक्षित और स्वच्छ विकल्पों को बढ...

भारतीय नागरिक उड्डयन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम: उपभोक्ता अधिकारों और सुरक्षा निगरानी पर DGCA का पुनर्गठन रिपोर्ट

  भारत के नागरिक उड्डयन नियामक — DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) — ने हाल ही में सरकार को एक विस्तृत पुनर्गठन रिपोर्ट सौंपी है। यह रिपोर्ट आने वाले वर्षों में भारत की विमानन व्यवस्था को पूरी तरह बदलने का रोडमैप पेश करती है। इसका मुख्य उद्देश्य है: यात्रियों के अधिकारों को मज़बूती देना और सुरक्षा व तकनीकी निरीक्षण के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंचाना। तेज़ी से बढ़ रहे विमानन क्षेत्र को देखते हुए DGCA ने इस रिपोर्ट में ऐसे सुधार सुझाए हैं जो उपभोक्ताओं, एयरलाइंस और नियामकों, तीनों के लिए एक अधिक पारदर्शी और सुरक्षित वातावरण तैयार करेंगे। पृष्ठभूमि: DGCA को पुनर्गठन की जरूरत क्यों पड़ी भारत का विमानन बाजार लगातार बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में भारतीय एयरलाइनों के पास 3,000 से ज़्यादा विमानों का बेड़ा होने की संभावना है। लेकिन इस तेज़ विकास के साथ कई चुनौतियाँ भी उभरकर सामने आई हैं— यात्रियों की शिकायतें, खासकर रिफंड और सेवा से जुड़ी समस्याएँ सुरक्षा निरीक्षण के लिए अपर्याप्त स्टाफ पुरानी प्रक्रियाएँ और तकनीकी खामियाँ ड्रोन और नई टेक्नोलॉजी के लिए स्पष्ट नियमों...

भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल और उमर अब्दुल्ला: श्रीनगर में आस्था और राजनीति का अनोखा संगम

  श्रीनगर की ठंडी पतझड़ की सुबह में कीर्तन की धुनें हवा में घुल रही थीं और लंगर की खुशबू पुरानी गलियों में फैल चुकी थी। अवसर था गुरपुरब — गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व। लेकिन इस बार का गुरपुरब सिर्फ आध्यात्मिक उत्सव नहीं था। भीड़ के बीच तीन नेता साथ-साथ चल रहे थे — पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला। उनकी मौजूदगी ने इस धार्मिक जुलूस को एक व्यापक, राष्ट्रीय संदर्भ दे दिया — यह याद दिलाते हुए कि आस्था और राजनीति कई बार बहुत सूक्ष्म तरीकों से एक-दूसरे को छूते हैं। श्रीनगर का नगर कीर्तन: कश्मीर की सांझी संस्कृति की झलक कश्मीरी सिख समुदाय संख्या में छोटा है, लेकिन सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण। चट्टी पदशाही गुरुद्वारे से शुरू हुआ नगर कीर्तन परंपरागत तरीके से पांव-पांव आगे बढ़ा। पांच प्यारों के नेतृत्व में जुलूस गुजरता गया और राह में सभी—सिख, मुस्लिम, हिंदू, पर्यटक—खुले दिल से लंगर ग्रहण करते रहे। इस माहौल ने उस दुर्लभ सद्भाव को दिखाया, जिसे आज की राजनीतिक बहसें अक्सर ढक देती हैं। धार्मिक ...